त्रैमासिक परीक्षा 2022
कक्षा-9वीं (951-A)
विषय - सामाजिक विज्ञान
समय - 3 घंटा मॉडल उत्तर पूर्णांक - 75 अंक
निर्देश
:-
1. प्रश्न क्रमांक से 5 तक वस्तुनिष्ठ प्रश्न
होंगे। प्रत्येक प्रश्न हेतु 6 अंक निर्धारित है।
2. प्रश्न क्रमांक 6 से 23 तक प्रत्येक में आंतरिक
विकल्प दिये गये हैं।
3. प्रश्न क्रमांक 6 से 17 तक प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का है। उत्तर लिखने
की शब्द सीमा लगभग 30 शब्द है।
4. प्रश्न क्रमांक 18 से 20 तक प्रत्येक प्रश्न 3 अंक का है। उत्तर लिखने
की शब्द सीमा लगभग 75 शब्द है।
5. प्रश्न क्रमांक 21 से 23 तक प्रत्येक प्रश्न 4 अंक का है। उत्तर लिखने
की शब्द सीमा लगभग 120 शब्द है।
6. प्रश्न क्रमांक 23 मानचित्र आधारित प्रश्न
है।
प्र. 1. निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए
- (1x6=6)
i. निम्न में से कौन सा जोड़ा नव – निर्मित केंद्र शासित
प्रदेश का है?
(अ) हैदराबाद-सिकंदराबाद
(ब) दमन दीव-अंडमान एंड निकोबार
(स) जम्मू-कश्मीर – लद्दाख
(द) जम्मू-कश्मीर – नई दिल्ली
उत्तर - (स) जम्मू-कश्मीर – लद्दाख
ii. किस स्थान पर भागीरथी
और अलकनंदा का संगम है?
(अ) रूद्र प्रयाग (ब) देव प्रयाग
(स) सोम प्रयाग (द)
इनमे से कोई नहीं
उत्तर - (ब) देव प्रयाग
iii. रूस में
राजशाही का पतन हुआ -
(अ) 1889 में
(ब) 1917 में
(स) 1915 में
(द) 1919 में
उत्तर - (ब) 1917 में
(अ) अब्राहम लिंकन
(ब) मिस्टर चर्चिल
(स) प्रो. लास्की
(द) गार्नर
उत्तर - (अ) अब्राहम लिंकन
v. रुसी साम्राज्य में
मुस्लिम धर्म सुधारक कहलाते थे -
(अ) उलेमा (ब) जदीद
(स) ड्यूमा (द) इनमे से कोई नहीं
उत्तर - (ब) जदीद
vi. भारत में बेरोजगारी का
सामान्य कारण है -
(अ) जनसंख्या वृद्धि
(ब) दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली
(स) मशीनीकरण
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर - (द) उपरोक्त सभी
प्र. 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए - (1x6=6)
i. भारत की
तटीय सीमा ................................................ किलोमीटर हैं ।
(द्वीप समूह के साथ)
उत्तर – 7516.6 किलोमीटर
ii. कार्ल
मार्क्स ने .......................................... नामक ग्रन्थ की रचना की।
उत्तर – दास कैपिटल
iii. अंग सांग
सू की ................................................................. की है।
उत्तर – म्यांमार
iv. नीति
निदेशक तत्व ................................... के संविधान से लिए गए हैं।
उत्तर – आयरलैंड
v. रासायनिक
उर्वरक ऐसे खनिज देते हैं जो ........................ में घुल जाते हैं।
उत्तर – जल / पानी
vi. ग्रामीण
रोजगार सृजन कार्यक्रम .................................... में प्रारंभ हुआ।
उत्तर – 1995
प्र.3- सही जोड़ी बनाइये- (1x6=6)
कॉलम ‘अ’ कॉलम
‘ब’
i. प्राकृतिक संसाधन
- अ) प्राथमिक
क्षेत्रक
ii. आजाद हिन्द फौज - ब)
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस
iii. मत्स्य
पालन -
स) रूस की संसद
iv. डॉ. राजेंद्र प्रसाद -
द) संविधान सभा के अध्यक्ष
v. ड्यूमा - इ)
भूमि
vi. गेस्तापो - फ)
गुप्तचर सेवा
उत्तर –
कॉलम ‘अ’ कॉलम
‘ब’
i. प्राकृतिक संसाधन - इ) भूमि
ii. आजाद हिन्द फौज - ब) नेताजी सुभाष चन्द्र बोस
iii. मत्स्य पालन -
अ) प्राथमिक क्षेत्रक
iv. डॉ. राजेंद्र प्रसाद
-
द) संविधान सभा के अध्यक्ष
v. ड्यूमा - स) रूस की संसद
vi. गेस्तापो - फ)
गुप्तचर सेवा
प्र.4- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य
लिखिये - (1x6=6)
i. मनरेगा का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर – महात्मा
गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार अधिनियम (2005)
ii. लॉन्ग वाक फ्रीडम किसकी आत्मकथा है?
उत्तर – नेल्सन
मंडेला
iii. ‘रिपब्लिकन’ के लेखक कौन हैं?
उत्तर – प्लेटो
iv. ‘युंगफ़ोक’ क्या था?
उत्तर – 10
से 14 वर्ष के बच्चों का नाजी संगठन
v. कृषि क्षेत्र में कौन सी बेरोजगारी पाई जाती है?
उत्तर – अल्प
बेरोजगारी / प्रछन्न बेरोजगारी / छिपी हुई बेरोजगारी
vi. प्रायद्वीपीय भारत की
सबसे लम्बी नदी कौन सी है?
उत्तर – गोदावरी
प्र.5- निम्नलिखित प्रश्नों में सत्य असत्य लिखिए - (1x6=6)
i. गुरु गोविन्द सागर नर्मदा नदी पर बनाया गया है।
उत्तर - असत्य
ii. फ़्रांस और ब्रिटेन मित्र राष्ट्र हैं।
उत्तर - सत्य
iii. 1918 से रूस में ग्रेगेरियन केलेंडर प्रारंभ किया गया।
उत्तर - सत्य
vii. भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।
उत्तर – सत्य
v. पालमपुर में पारंपरिक बीजों के प्रयोग से उपज अधिक होती
थी ।
उत्तर – असत्य
vi. प्रत्येक व्यक्ति एक कीमती राष्ट्रीय संसाधन है।
उत्तर – सत्य
प्र.6- मानक याम्योतर से क्या आशय है? 2
अथवा
भारत के तीनों ओर विस्तृत जल राशियों के नाम लिखिए ।
उत्तर – पृथ्वी
के उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुव को
मिलाने वाली और उत्तर-दक्षिण दिशा में खींची गयी काल्पनिक रेखाओं को याम्योत्तर,
देशान्तर, मध्यान्तर
रेखाएं कहते हैं। मानक
याम्योत्तर से आशय मानक समय को निर्धारित करने के लिए प्रयुक्त एक देशांतर अथवा
मध्यांतर रेखा है जो कि भारत के लिए 82030” पूर्वी देशांतर है
।
अथवा
भारत के
तीनों ओर विस्तृत जल राशियों के नाम निम्नलिखित हैं –
पूर्व की
ओर – बंगाल की खाड़ी
दक्षिण
की ओर - हिन्द महासागर
पश्चिम
की ओर -
अरब सागर
प्र.7- भारत की कोई दो मीठे पानी की झीलों के नाम
लिखिए। 2
अथवा
गोखुर झील के उदहारण लिखिए।
उत्तर – भारत
की मीठे पानी की झीलों के नाम निम्नलिखित हैं –
वुलर , डल, भीमताल, नैनीताल, लोकताक और बारापानी
अथवा
गोखुर झील के उदहारण -
मिसिसिपी नदी पर चिकोट झील
गंगा नदी पर कांवर झील
प्र.8- पृथ्वी पर स्वच्छ पानी की मात्रा कितने
प्रतिशत है? 2
अथवा
ताप्ती नदी का मध्यप्रदेश के किस जिले से उद्गम है?
उत्तर –
पृथ्वी पर स्वच्छ पानी 3% है।
अथवा
ताप्ती नदी का मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई नामक
स्थान पर उद्गम है ।
प्र.9- पहला विश्व युद्ध कब से कब तक लड़ा गया? 2
अथवा
कार्ल मार्क्स का पूंजीवाद पर क्या विचार था?
उत्तर – पहला
विश्व युद्ध 1914 से 1918 के बीच लड़ा गया ।
अथवा
कार्ल मार्क्स का पूंजीवाद पर विचार - “औद्योगिक समाज पूंजीवादी समाज है । फैक्ट्रियों पर लगी
पूँजी पर पूजीपतियों का स्वामित्व है और पूंजीपतियों का मुनाफा मजदूरों की मेहनत
से पैदा होता है । जब तक पूंजीपति मुनाफे का संचय करते रहेंगे तब तक मजदूरों
की स्थिति में कभी सुधार नहीं हो सकता ।“ इस प्रकार कार्ल मार्क्स पूंजीवाद को सर्वहारा के शोषण का
विचार मानता था ।
प्र.10- फ़्रांस के सन्दर्भ में टाईद क्या था? 2
अथवा
रूसो कौन था? फ्रांस की राज्य क्रांति में इसका क्या योगदान
था?
उत्तर – फ़्रांस
के सन्दर्भ में टाईद एक धार्मिक कर था जो किसानों से चर्च द्वारा लिया
जाने वाला धार्मिक कर। यह उपज का दसवें हिस्से के बराबर होता था।
अथवा
उत्तर- रूसो एक
दार्शनिक और महान विचारक था। जिसके विचारों का प्रभाव फ्राँस की जनता पर अन्य
लेखकों तथा विचारकों की तुलना में सबसे अधिक पड़ा। हालांकि रूसो की मृत्यु 1778 में क्रांति के पूर्व
ही हो गई थी किन्तु उसकी पुस्तक सोशल कॉन्ट्रैक्ट द्वारा लोगों को क्रांति के लिए
प्रेरित करने वाले विचार मिले।
उसने लोगों के सामने
एक ऐसे समाज की स्थापना का विचार रखा जिसमें उन्हें स्वतंत्रता, समानता और न्याय की
प्राप्ति की आशा थी। उसके इन नवीन विचारों ने क्रांतिकारी विस्फोट को जन्म दिया।
प्र.11- फ़्रांस की क्रांति कब आरंभ हुई ? इसके दो
प्रभाव लिखिए । 2
अथवा
फ़्रांस में दास प्रथा का उन्मूलन कब और किसने किया?
उत्तर – फ़्रांस की क्रांति 1789 को जुलाई माह में आरंभ हुई –
1.
निरंकुश शासन का
अंत और गणतंत्र की स्थापना
2.
लिखित संविधान
3. स्वतंत्रता, समानता और
बंधुत्व की भावना
4.
लोकप्रिय
सम्प्रभुता का सिद्धांत
5.
मानव अधिकारों की
घोषणा
6.
प्रशासन में सुधार
7.
समान कानून और
कानूनों का संग्रह
8. चर्च का पुर्नगठन
9. सामाजिक समानता का युग
10. कृषकों की दशा में सुधार
11. शिक्षा और साहित्य में प्रगति
12. राष्ट्रीय भावना का विकास
अथवा
सन् 1794 के
कन्वेंशन ने फ्रांसीसी उपनिवेशों में सभी दासों की मुक्ति का कानून पारित कर दिया।
यह कानून एक छोटी-सी अवधि तक ही लागू रहा । दस वर्ष बाद नेपोलियन ने दास - प्रथा
पुनः शुरू कर दी। फ्रांसीसी उपनिवेशों से अंतिम रूप से दास-प्रथा का उन्मूलन 1848 मे किया गया।
प्र.12- डेमोक्रेसी का क्या अर्थ है? 2
अथवा
लोकतंत्र क्यों आवश्यक है?
उत्तर – डेमोक्रेसी
- ‘डेमोक्रेसी’ यूनानी शब्द
डेमोक्रेशिया से बना है। यूनान में डेमोस का अर्थ होता है ‘लोग’ और ‘क्रेशिया’ का
अर्थ होता है ‘शासन’। इस प्रकार डेमोक्रेसी अर्थात लोकतंत्र का अर्थ है ‘लोगों का
शासन’।
अथवा
लोकतंत्र क्यों आवश्यक है इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –
1. लोकतांत्रिक
शासन पद्धति दूसरों से बेहतर है क्योंकि यह शासन का अधिक जवाबदेही वाला स्वरूप है
।
2. लोकतंत्र
बेहतर निरनत लेने की सम्भावना बढाता है ।
3. लोकतंत्र
नागरिकों का सम्मान बढाता है ।
4. लोकतंत्र
में हमें अपने गलती ठीक करने का अवसर उपलब्ध होता है ।
प्र.13- भारतीय संविधान की प्रस्तावना लिखिए। 2
अथवा
संसदीय शासन प्रणाली क्या हैं?
उत्तर – भारतीय
संविधान की प्रस्तावना
हम,
भारत के लोग,
भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न ,
समाजवादी, पंथ निरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य
बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों कोः
सामाजिक,
आर्थिक और राजनैतिक न्याय,
विचार,
अभिव्यक्ति,
विश्वास,
धर्म
और उपासना की स्वतंत्रता,
प्रतिष्ठा और अवसर की समता,
प्राप्त करने के लिए,
तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और
राष्ट्र की एकता और अखंडता
सुनिश्चित करने वाली
बंधुता बढ़ाने के लिए
दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में
आज तारीख 26 नवंबर, 949 ई. (मिति मार्गशीर्ष शुक्ला सप्तमी, संवत् दो हजार छह
विक्रमी ) को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
अथवा
संसदीय प्रणाली एक राज्य की
लोकतांत्रिक शासन प्रणाली है, जिसमें
कार्यपालिका अपनी लोकतांत्रिक वैधता को प्राप्त करती है, और विधायिका (संसद) के प्रति
जवाबदेह होती है। कार्यपालिका विधायिका का हिस्सा बनती है। भारत में, कार्यपालिका का सदस्य बनने के
लिए व्यक्ति को संसद का सदस्य होना चाहिए।
प्र.14- मौलिक कर्तव्य क्या हैं? 2
अथवा
नीति निर्देशक तत्व क्या है?
उत्तर –साधारण शब्दों में,
किसी कार्य को करने की
जिम्मेदारी को कर्त्तव्य कहते हैं। मौलिक
कर्त्तव्य ऐसे बुनियादी कर्त्तव्यों को कहते हैं जो व्यक्ति को अपनी उन्नति व
विकास के लिए तथा समाज व देश को प्रगति के लिए अवश्य ही करने चाहिए। संविधान
में मौलिक
कर्तव्य के अंतर्गत नैतिक और
नागरिक दोनों प्रकार के कर्तव्यों को शामिल किया गया है.
जैसे नैतिक कर्तव्य - स्वतंत्रता के लिए
प्रेरित करने वाले महान कर्तव्य को पालन करना और नागरिक कर्तव्य - राष्ट्रीय गान, राष्ट्रीय ध्वज एवं संविधान का
पालन करना नागरिक कर्तव्य है.
अथवा
नीति निर्देशक तत्व समाज के कल्याण के लिए सरकार को निर्देश
देते हैं | नीति
निर्देशक तत्व को
न्यायालय द्वारा लागू नहीं किया जा सकता यानी कि नीति निर्देशक तत्वों को वैधानिक
शक्ति प्राप्त नहीं है | यह
सरकार पर निर्भर करता है कि वह इसे लागू करना चाहती हैं या नहीं करना चाहती । भारत के संविधान में नीति नर्देशक तत्व आयरलैंड के संविधान
से लिए गए हैं ।
प्र.15- बेरोजगारी से क्या आशय है? 2
अथवा
अर्थव्यवस्था के प्राथमिक क्षेत्र से क्या आशय है?
उत्तर – बेरोजगारी
उस समय विद्यमान कही जाती है जब प्रचलित मजदूरी की दर पर काम करने के लिए इच्छुक
लोग रोजगार नहीं हासिल कर सकें।
अथवा
अर्थव्यवस्था के प्राथमिक क्षेत्र से आशय उस क्षेत्र से है
जिसमें कृषि, वानिकी, पशुपालन, मत्स्यपालन, मुर्गीपालन, और खनन तथा उत्खनन शामिल होता है ।
प्र.16- आर्थिक और गैर – आर्थिक क्रियाओं में क्या
अंतर है? 3
अथवा
अर्थव्यवस्था के द्वितीयक क्षेत्र के दो उदहारण लिखिए ।
उत्तर - आर्थिक क्रियाएँ: वे क्रियाएँ
है जिनसे लोगों की आय होती है। जैसे- रिक्शा चलाना, सब्ज़ी बेचना आदि। ग़ैर आर्थिक क्रियाएँ: ऐसी क्रियाएँ
जिनसे कोई आय प्राप्त नहीं होती ग़ैर आर्थिक क्रियाएँ कहलाती है।
जैसे- निःशुल्क पढ़ाना आदि।
अथवा
अर्थव्यवस्था
के द्वितीयक क्षेत्रक में विनिर्माण शामिल होते हैं. लौह
एवं इस्पात उद्योग, वस्त्र
उद्योग, वाहन उद्योग, बिस्किट उद्योग, केक
उद्योग, सीमेंट उद्योग, कंप्यूटर
इत्यादि उद्योग।
प्र.17- रबी और खरीफ़ की फसलों के नाम लिखिए । 3
अथवा
उत्पादन के कारक किसे कहते हैं?
उत्तर – रबी
की फसल – गेहूं,
जौ, जई
(अनाज), चना, मटर / दाल (दलहन), अलसी, सरसों (तिलहन) आदि शामिल हैं।
खरीफ़ की फसल - चावल, मक्का, ज्वार, मक्का, बाजरा, रागी (अनाज), अरहर (दालें), सोयाबीन, मूंगफली (तिलहन), कपास आदि शामिल हैं।
अथवा
वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन के लिए आवश्यक कारक निम्नलिखित
हैं -
i) भूमि - पहली आवश्यकता है भूमि तथा अन्य प्राकृतिक संसाधन जैसे जल, वन खनिज की
भी आवश्यकता है।
ii) श्रम : अर्थात जो लोग काम करेगें । कुछ उत्पादन क्रियाओं में
शिक्षित कर्मियों की भी आवश्यकता है।
iii) भौतिक पूंजी : उत्पादन के समय प्रत्येक स्तर पर काम आने वाली आगतें जैसे
इमारतें, मशीनें औजार आदि । इसमें स्थायी और कार्यशील पूंजी दोनों
शामिल हैं।
इस प्रकार उत्पादन भूमि, श्रम और पूँजी को
संयोजित करके संगठित होता है, जिन्हें उत्पादन के कारक कहते हैं.
प्र.18- भारत को उपमहाद्वीप की संज्ञा क्यों दी जाती
है? तीन बिन्दुओं में स्पष्ट कीजिये । 3
अथवा
कर्क रेखा का भारत की जलवायु में महत्व है । कोई दो महत्व
को लिखिए।
उत्तर : उपमहाद्वीपः- जब कोई स्थान किसी महाद्वीप का हिस्सा
होता है, लेकिन तुलनात्मक रूप से भौगोलिक रूप से अलग और छोटा होता है, तो उसे उपमहाद्वीप कहा जाता है। जिसकी अपनी एक अलग पहचान हो और भोगोलिक
रूप से वह हिस्सा पूरे महाद्वीप से अगल थलग सा दिखता हो। इसके आलावा भोगोलिक, सांस्कृतिक, खान पान के आधार पर एक अलग पहचान रखने वाला महाद्वीप का एक हिस्सा उप
महाद्वीप कहलाता है।
भारत को उपमहाद्वीप की संज्ञा दी जाती है क्योंकि
–
1. उपमहाद्वीप के उत्तर में हिमालय है। हिमालय
इस हिस्से को एशिया के और देशों से बिलकुल अलग कर देता है।
2. भारत के दक्षिण में हिंदी महासागर, पश्चिम में अरब सागर और पूर्व में
बंगाल की खाड़ी है।
3. राजनीतिक और सांस्कृतिक अस्तित्व की दृष्टि
से यह विभिन्न संस्कृतियों और नस्लों का घर है।
इन्हीं राजनितिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक
परिस्थितियां के कारण भारत को उपमहाद्वीप कहा जाता है।
अथवा
भारतीय उपमहाद्वीप एक भौगोलिक विविधता वाला
क्षेत्र है। इसमें पर्वत, पठार, प्रायद्वीप, द्वीप,
ठंडा रेगिस्तान, गर्म रेगिस्तान, खाड़ी, महासागर, समुद्र,
नदियाँ, डेल्टा, ज्वालामुखी
और विभिन्न प्रकार के वन हैं और कई मौसम भी। अब भारत में मौसम विभिन्न वन्यजीवों,
विभिन्न फसलों, खनिजों और क्षेत्र में पाए जाने
वाले पौधों की प्रजातियों का कारण है। और यह मौसम भारत देश में कर्क रेखा के कारण इतने
प्रभावशाली तरीके से होता है । कर्क रेखा का भारत की जलवायु में
महत्व को इस प्रकार से समझा जा सकता है –
1. कर्क रेखा भारत को दो भागों में विभाजित करता
है, एक उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में
और दूसरा उत्तरी समशीतोष्ण क्षेत्र में।
2. जब
सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर सीधी पड़ती हैं तो हमारे पास गर्मी होती है और गर्मियों
के दौरान कम दबाव और उच्च तापमान होता है, जबकि दक्षिणी गोलार्ध में उच्च दबाव होता है, इसलिए हवाएं उच्च दबाव से कम दबाव की ओर बहने लगती हैं और आगे विक्षेपित हो
जाती हैं। भारत की ओर भूमध्य रेखा और ये हवाएँ रास्ते में पानी इकट्ठा करती हैं इसलिए
वे भारत के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश का कारण बनती हैं ये हवाएँ मानसून हैं।
भारत के लिए मानसून बहुत महत्वपूर्ण है और यह कर्क रेखा के कारण ही होता है।
3. जब सूर्य की किरणें कर्क रेखा से दूर होती हैं
तो सर्दियां होती हैं और इसी तरह के बाकी मौसम तब होते हैं जब सूर्य की किरणें कर्क
और मकर राशि के बीच होती हैं। तो अब आप जान ही गए होंगे कि भारत के लिए कर्क रेखा कितनी
महत्वपूर्ण है।
प्र.19- 1917 में जार का शासन क्यों खत्म हो गया? 3
अथवा
निजी संपत्ति के बारे में पूंजीवादी और समाजवादी विचारधारा के बीच दो अंतर
बताइए ।
उत्तर - जार
की नीतियों से जनता में बढ़ते अविश्वास व विद्रोह स्वरुप 1917ई. में जार के शासन का अंत हो
गया उसके लिए निम्नलिखित कारण उत्तरदायी थे -
i. जार निकोलस द्वितीय द्वारा
अपनी सत्ता के विरुद्ध उठे सवालों को नियत्रित करने राजनैतिक गतिविधियों पर रोक
लगा दी गई व मतदान के नियम बदल डाले। इससे लोगों में असंतोष पैदा होने लगा।
ii. प्रथम विश्व युद्ध के प्रारंभ
में रुसी जनता जार के साथ थी परन्तु जार द्वारा ड्यूमा के प्रमुख दलों से सलाह
लेने के इंकार के कारण उसने रुसी जनता का समर्थन खो दिया।
iii. जार निकोलस की पत्नी महारानी
जरीना के जर्मन मूल का होने और उसके रासपुतिन जैसे सलाहकारों ने राजशाही को लोकप्रिय
बना दिया।
iv. प्रथम विश्वयुद्ध में जर्मनी व
आस्ट्रिया से पराजित हो पीछे हटती रुसी सेनाओं ने फसलों व इमारतों को नष्ट कर दिया
इससे ब्रेड रोटी और आटे की किल्लत हो गई ब्रेड रोटी की दुकानों पर दंगे होने लगे।
इस कारण ने भी जार शासन को अलोकप्रिय बना दिया। जार द्वारा 25 फरवरी 1917 को ड्यूमा को बर्खास्त करने के
फैसले से असंख्य लोग जार के खिलाफ खड़े हो गए तब 2 मार्च को जार गद्दी छोड़ने को
मजबूर हो गया। और इससे निरंकुशता का अंत हो गया।
अथवा
निजी
संपत्ति के बारे में पूंजीवाद और समाजवाद विचारधारा में दो अंतर निम्नलिखित हैं
(i)
पूंजीपतियों का मानना था कि व्यक्तियों
के पास निजी संपत्ति होती है जबकि समाजवादियों का मानना था कि सभी
संपत्ति समग्र रूप से समाज की होती है, अर्थात राज्य की।
(ii)
पूंजीपतियों का मानना था कि संपत्ति
से होने वाला लाभ संपत्ति के मालिकों का होना चाहिए, जबकि समाजवादी का मानना था कि मुनाफा
श्रमिकों के श्रम के कारण होता है और इसलिए उन्हें उन्हें साझा करना चाहिए।
प्र.20- संविधान क्या है? संविधान की तीन विशेषताएँ लिखिए। 3
अथवा
पंथ निरपेक्ष संविधान, लोकतांत्रिक गणराज्य का
क्या अर्थ है?
उत्तर – संविधान
शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है सम + विधान अर्थात वे नियम या कानून जो सभी के लिए
सामान रूप से लागू हों संविधान कहलाता है । परिभाषित रूप में नियमों या कानूनों के
संकलित प्रलेख को संविधान कहते हैं ।
भारतीय
संविधान की प्रमुख विशेषताएँ –
1. लिखित एवं निर्मित संविधान- भारत का संविधान लिखित है इसमें सरकार के संगठन के आधारभूत सिद्धांत
औपचारिक रूप से लिख दिए गए हैं कार्यपालिका, विधायिका
और आदि को स्पष्ट कर दिया गया है।
2. संघात्मक एवं एकात्मक- भारतीय संविधान का बाहरी ढांचा संघात्मक है,
परंतु इसका आंतरिक स्वरूप एकात्मक है। संघात्मक स्वरूप में केंद्र
तथा राज्यों की शक्तियों का बंटवारा किया गया है। और न्यायपालिका को कार्यकारिणी
से स्वतंत्र रखा गया है, किंतु आपातकाल में यही संविधान
एकात्मक रूप धारण कर लेता है और शासन की शक्ति केंद्र सरकार में निहित हो जाती है
3. विशाल संविधान- यह संसार का विशालतम संविधान है इसमें 404
अनुच्छेद 9 अनुसूचियां और 24 खंड हैं।
4. लोक कल्याणकारी राज्य- भारत का संविधान राज्य को एक लोक कल्याणकारी
राज्य घोषित करता है। शासन जनता का सेवक है, ना कि कोई भयानक
वस्तु, राज्य का लक्ष्य जनता का कल्याण करना है।
5. एक नागरिकता- सारे भारत में एक नागरिकता भारतीय नागरिकता है,
भारतीय संपूर्ण देश का नागरिक है। पृथक से किसी राज्य का
नहीं।संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे संघात्मक संविधान में नागरिकों को दोहरी नागरिकता
प्राप्त है,अपने राज्य की और संघ की परंतु, भारत में एक ही नागरिकता है।
6. लचीला संविधान- यह संविधान लचीला है, कठोर
नहीं, यह संविधान संशोधन के मामले में आसान है।
7. संसदीय शासन प्रणाली- भारतीय संविधान में संसदीय शासन प्रणाली का
प्रावधान है। इसमें दो प्रकार की कार्यपालिका है। पहली नाममात्र की (राष्ट्रपति)
और दूसरी वास्तविक (मंत्रिमंडल)।
8. मूल अधिकारों की व्यवस्था- भारतीय संविधान में नागरिकों के लिए कुछ मूल
अधिकारों की व्यवस्था की गई है। इन्हें छीना नहीं जा सकता है। यहां तक कि
कार्यपालिका और विधायिका इन में हस्तक्षेप नहीं कर सकती हैं। हस्तक्षेप करने पर
न्यायपालिका इनकी रक्षा करती है।
9. नीति निर्देशक तत्व - भारतीय संविधान में कुछ नीति निर्देशक तत्वों का
भी प्रावधान किया गया है इनके द्वारा केंद्र तथा राज्य सरकारों को यह आदेश दिया
गया है कि जनता के जीवन को सुखी बनाने की दिशा में काम करें।
10. स्वतंत्र एवं सर्वोच्च
न्यायालय- सर्वोच्च
न्यायालय की स्थापना संघीय संविधान की एक विशेषता है। केंद्र और राज्यों के
विवादों को तय करने तथा नागरिकों के मूल अधिकारों की रक्षा करने में सर्वोच्च
न्यायालय की अहम भूमिका होती है।
12. अनुसूचित तथा जनजातियों को
विशेष संरक्षण- अनुसूचित जन
जातियों के उत्थान के लिए संविधान में विशेष व्यवस्था की गई है।
13. धर्मनिरपेक्ष राज्य - भारत को एक धर्मनिरपेक्ष राज्य का दर्जा संविधान
ने दिया है। राज्य किसी विशेष धर्म के साथ पक्ष या विरोध नहीं करेगा धर्म के विषय
में संविधान तटस्थ रहेगा।
14. समाजवादी राज्य - समाजवाद का मार्ग सबसे उत्तम माना जाता है,
समाजवादी राज्य से घोषित किया गया है।
पंथनिरपेक्ष संविधान से आशय यह है कि संविधान की दृष्टि में सभी धर्म समान
हैं और धर्म , पंथ एवं उपासना रीति के
आधार पर राज्य किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं करेगा।
·
पंथनिरपेक्षता
का अर्थ है कि राज्य राजनीति या किसी गैर-धार्मिक मामले से धर्म या पंथ को दूर रखे तथा सरकार पंथ या धर्म के आधार पर किसी से भी
कोई भेदभाव न करे।
·
पंथनिरपेक्षता
का अर्थ किसी के पंथ या धर्म
का विरोध करना नहीं है बल्कि सभी को अपने धार्मिक विश्वासों एवं मान्यताओं को पूरी
आज़ादी से मानने की छूट देता है।
·
पंथनिरपेक्ष
राज्य में उस व्यक्ति का भी सम्मान होता है जो किसी भी पंथ या धर्म को नहीं मानता है।
·
पंथनिरपेक्षता
के संदर्भ में धर्म, व्यक्ति
का नितांत निजी मामला है, जिसमे
राज्य तब तक हस्तक्षेप नहीं करता जब तक कि विभिन्न धर्मों की मूल धारणाओं में आपस
में टकराव की स्थिति उत्पन्न न हो।
लोकतांत्रिक
गणराज्य का अर्थ -
एक गणराज्य
या गणतंत्र सरकार का एक रूप है जिसमें देश को एक “सार्वजनिक मामला“ माना जाता है, न कि शासकों की निजी संस्था या सम्पत्ति। एक गणराज्य के भीतर
शासक का पद विरासत में नहीं मिलता हैं। यह सरकार का एक रूप है जिसके अंतर्गत राज्य
का प्रमुख राजा नहीं होता। आमतौर
पर देश के जनता की, जनता
के द्वारा व जनता के लिए सरकार का गठन माना जाता है । इसका अर्थ है कि सरकार जनता
द्वारा निर्वाचित तथा जनता के प्रति उत्तरदायी है।
गणराज्य एक
ऐसा देश होता है जहां के शासनतन्त्र में सैद्धान्तिक रूप से देश का सर्वोच्च पद पर
आम जनता में से कोई भी व्यक्ति पदासीन हो सकता है। इस तरह के शासनतन्त्र को गणतन्त्र
कहा जाता है। “लोकतंत्र“ या “प्रजातंत्र“ इससे अलग होता है। लोकतन्त्र वो शासनतन्त्र
होता है जहाँ वास्तव में सामान्य जनता या उसके बहुमत की इच्छा से शासन चलता है। आज
विश्व के अधिकान्श देश गणराज्य हैं और इसके साथ-साथ लोकतान्त्रिक भी। इस प्रकार भारत
एक लोकतान्त्रिक गणराज्य है।
हर गणराज्य
का लोकतान्त्रिक होना अवश्यक नहीं है। तानाशाही, जैसे हिट्लर का नाज़ीवाद, मुसोलीनी का फ़ासीवाद, पाकिस्तान और कई अन्य देशों में फ़ौजी तानाशाही, चीन,
सोवियत संघ में साम्यवादी तानाशाही, इत्यादि गणतन्त्र हैं, क्योंकि उनका राष्ट्राध्यक्ष एक सामान्य व्यक्ति है या थे। लेकिन
इन राज्यों में लोकतान्त्रिक चुनाव नहीं होते, जनता और विपक्ष को दबाया जाता है और जनता की इच्छा से शासन नहीं
चलता।
प्र.21- जापान एक विकसित और धनी देश क्यों है? 4
अथवा
भारत में निर्धनता के क्या कारण हैं? चार
कारण लिखिए ।
उत्तर - जापान
के पास कोई प्राकृतिक संसाधन नहीं थे। जापान
ने मानव संसाधन पर निवेश किया इस देश ने अपने लोगों पर निवेश किया। वे अपने देश के लिए आवश्यक प्राकृतिक संसाधनों का आयात
करते हैं ।
उन्होंने लोगों में विशेष रूप से शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में निवेश किया । जापान के लोगों ने भूमि और पूँजी जैसे अन्य संसाधनों का
कुशलतापूर्वक उपयोग किया । अंततः इन लोगों ने अपने
संसाधनों का दक्षतापूर्ण उपयोग करने के बाद नई तकनीक विकसित करते हुए अपने देश को
समृद्ध एवं विकसित बना दिया है।
अथवा
निर्धनता
या गरीबी एक बहुआयामी समस्या है जिसका समाधान सरल एवं सहज नहीं हैं। सच में तो गरीबी
को पूरी तरह से दूर करना असम्भव सा है। लेकिन निर्धनता को कम किया जा सकता है। गरीबी
हटाने के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित उपाय को अपनाना श्रेयस्कर होगाः
1.
जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण- बढ़ती हुई परिवार की संख्या के
कारण परिवार की आर्थिक हालत बहुत खराब हो जाती है यदि इस पर नियंत्रण हो जाये तो परिवार
की स्थिति को सुधारा भी जा सकता है।
2.
रोजगार के अवसर में वृद्धि- निर्धनता का एक मुख्य कारण रोजगार
के अवसर की कमी है। यदि रोजगारों के अवसर में वृद्धि की जायें तो लोगों के जीवन स्तर
में सुधार आयेगा और उनकी आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी जिससे वे अपने बच्चों की बुनियादी
अवष्यकताओं पूरी कर पायेंगे जिससे बालक विकास में वृद्धि होगी।
3.
व्यक्तिगत एवं सामाजिक मूल्यों में परिवर्तन- भारत में परम्परागत
रूप से अलग -अलग धर्म एवं जाति के लोग रहते हैं और उनके अलग-अलग व्यक्तिगत एवं सामाजिक
मूल्य निर्धारित होते हैं। जैसे- बाह्यण जाति के लिए निम्न जाति के लोगों से सेवा कराना, श्रमिक का काम कराना। इसी प्रकार निम्न जाति के लोगों को उच्च
कार्य वर्णित थे। इन सभी मूल्यों में परिवर्तन आवश्यक है। इनमें परिवर्तन होने से लोगों
के सामाजिक मूल्य ऊँचे उठते हैं जिनसे इनका जीवन स्तर उच्च होता है।
4.
शिक्षा- शिक्षा किसी बात की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है शिक्षा
से व्यक्ति की सोच विकसित होती है और वह अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होते हैं लेकिन
अशिक्षित लोगों का हमेशा शोषण होता रहा है। इसलिए यदि गरीब लोग शिक्षित होंगे तो कोई
भी उनका शोषण नहीं कर पायेगा और जो वो मेहनत करते हैं तो उन्हें उनका पूरा भुगतान मिलेगा
जिससे वे अपने बच्चों को सुख-सुविधा दे पायेंगे और शिक्षित होने से माता-पिता गरीब
होने के बावजूद भी अपने बच्चों को शिक्षित कर उन्हें समाज में स्थान दिला पायेंगे।
5.
आय का पुनर्वितरण - आय और धन के वितरण की असमानता गरीबी को स्थायी
बना देती है। यह नागरिकों की कार्यकुशलता को भी विपरीत रूप से प्रभावित करती है। जब
देश की अर्थव्यवस्था का ढांचा इस प्रकार का हो कि विकास के प्रयत्नों के कारण बढ़ी हुई
आय को अमीर लोग ही हड़प जाते हों तो विकास के सारे प्रयत्न ही बेकार हो जाते हैं। ऐसी
स्थिति मे गरीबी घटने की बजाय और अधिक बढ़ जाती है। भारत में बहुत कुछ हद तक ऐसा ही
हो रहा है। अतः यहां गरीबी उन्मूलन के लिए आय इस प्रकार पुनर्वितरण कराना आवश्यक है
जिससे गरीब वर्ग की आय व उपभोग का स्तर ऊंचा उठ सके। इसके लिए राष्ट्रीय साधन, सम्पत्ति एवं आय के प्रवाह को अमीरों से गरीबों की ओर मोड़ना
होगा।
6.
विकास की ऊंची दर - गरीबी उन्मूलन के लिए आय का पुनर्वितरण, जनसंख्या नियन्त्रण आदि उपायों का महत्व है, किन्तु इनकी कुछ सीमाएं हैं। अतः यह आवश्यक है कि गरीबी के स्थायी
उपचार हेतु आर्थिक विकास की दर बढ़ाने पर ही सर्वाधिक ध्यान देना होगा। यद्यपि आय के
पुनर्वितरण के द्वारा वर्तमान वस्तुओं आपस में बंटवारा तो सम्भव है। किन्तु देश की
वस्तुओं के कुल भंडारों में वृद्धि करने के लिए तो उत्पादन में वृद्धि करनी होगी। अतः
भारत में गरीबी-उन्मूलन की दृष्टि से तीव्र आर्थिक विकास सर्वप्रथम अनिवार्य शर्त हैं
तीव्र आर्थिक विकास के लिए हमें उत्पादकता एवं कार्यकुशलता बढ़ाने, तकनीकी ज्ञान के स्तर में सुधार लाने, देश के मानवीय व प्राकृतिक साधनों का पूरा-पूरा उपयोग करने जैसे
उपाय करने होंगे।
7.
कृषि का विकास - भारत मूल रूप से एक कृषि प्रधान देश है और भारत
की खेती पिछड़ी हुई है। भारत में गरीबों का काफी बड़ा भाग कृषि क्षेत्र में ही पाया जाता
है। अतः कृषि के विकास पर ध्यान देना प्रथम प्राथमिकता होना चाहिए। भूमिहीन किसानों
व सीमान्त किसानों की स्थिति में सुधार लाने हेतु विशेष प्रयास किये जाने चाहिए। ग्रामीण
क्षेत्र की गरीबी को दूर करने के लिए भूमि का पुनर्वितरण भी काफी उपयोगी उपाय है।
8.
कुटीर व लघु उद्योगों का विकास - भारत में बेरोजगार लोगों को
रोजगार प्रदान करने की दृष्टि से कुटीर व लघु उद्योगों का विकास किया जाना आवश्यक है।
इससे न केवल बेरोजगार गरीब लोगों को काम मिलेगा वरन् आय व असमानता भी घटेगी।
9.
सामाजिक भागीदारी - यदि गरीब लोग विकास के कार्यक्रमों में सक्रिय
भागीदारी प्रारम्भ कर दे तो गरीबी को दूर किया जाना सरल हो जाएगा। इसके लिए गरीबों
को स्वयं को गरीबी-उन्मूलन और आर्थिक विकास के कार्यक्रमों में शामिल करना होगा। इस
कार्य में पंचायती राज संस्थानों,
स्वैच्छिक संगठनों और स्व-सहायता समूहों की भागीदारी को बढ़ाना
आवश्यक होगा।
10.
छिपी हई बेरोजगारी की समाप्ति और रोजगार में वृद्धि - निर्धनता
दूर करने के लिए रोजगार,
अर्द्ध रोजगार तथा छिपी हुई बेरोजगारी को दूर करने के लिए विशेष
प्रयत्न किये जाने आवश्यक हैं। ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने के अधिक अवसर हैं
उनका पूरा लाभ उठाना चाहिए। कृषि का विकास करके भूमि पर एक से अधिक फसल उगाने के फलस्वरूप
अर्द्ध बेरोजगारी तथा छिपी बेरोजगारी को कम किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्र में कुटीर
उद्योग, निर्माण आदि के कार्यों का विकास किया जाना चाहिए। शहरों में
लघु उद्योग, यातायात आदि का अधिक विकास किया जाना चाहिए। शिक्षा की प्रणाली
में परिवर्तन करके शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार प्रदान किया जाना चाहिए।
11.
उत्पादन की तकनीकों में परिवर्तन - भारतीय अर्थव्यवस्था में
इस प्रकार का तकनीकी विकास करना चाहिए जिससे श्रम का पूरा उपयेग हो सके। वास्तव में, भारत के लिए मध्यम तकनीकें, जो श्रम प्रधान तथा पूंजी प्रधान तकनीकों के मध्य का मार्ग हैं, अपनाई जानी चाहिए। इसके फलस्वरूप रोजगार की मात्रा बढे़गी तथा
निर्धनता को दूर किया जा सकेगा।
12.
पिछड़े क्षेत्रों पर विशेष ध्यान - भारत में कुछ क्षेत्र जैसे
उड़ीसा, नागालैंड,
उत्तर प्रदेश, बिहार आदि में आज भी निर्धनों
का अनुपात दूसरे प्रदेशों से अधिक है। सरकार को पिछड़े इलाकों में विशेष सुविधायें प्रदान
करनी चाहिए जिससे निजी पूंजी उन प्रदेशों में निवेश किया जाना सम्भव हो सकें। इसके
लिए सार्वजनिक क्षेत्रों का भी विकास किया जाना चाहिए।
13.
न्यूनतम आवश्यकताओं की सन्तुष्टि - सरकार को निर्धनों की न्यूनतम
आवश्यकताओं जैसे पीने का पानी,
प्राथमिक चिकित्सा, प्राथमिक शिक्षा आदि को सन्तुष्ट करने के प्रयत्न करने चाहिए।
इसके लिए यदि सरकार को अधिक से अधिक राशि व्यय करनी पडे़ तो कोई बुराई नहीं है।
14.
निर्धनों की उत्पादकता में वृद्धि - डॉ. वी.के.आर.वी.राव के
अनुसार निर्धनता को दूर करने के लिए निर्धनों की आर्थिक उत्पादकता को बढ़ाना आवश्यक
है। निर्धनों को स्वयं सतर्क होकर रोजगार की अवस्था को प्राप्त करने के प्रयत्न करने
चाहिए। सरकार को इसके लिए सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्रों में अधिक निवेश करना चाहिए।
निर्धन वर्ग को रोजगार विन्मुख प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए तथा उनकी उत्पादकता बढ़ाने
के प्रयत्न किये जाने चाहिए।
प्र.22- फ़्रांस की क्रांति कब आरंभ हुई? इसके चार प्रभाव लिखिए । 4
अथवा
जैकोबिंस कौन थे? इन्होने देश में किस प्रकार आतंक फैलाया?
उत्तर – फ़्रांस की क्रांति 1789 को जुलाई माह में आरंभ हुई –
1789 की फ्रांसीसी क्रांति के का प्रभाव
1. निरंकुश शासन का अंत
और गणतंत्र की स्थापना- इस क्रांति से फ्रांस में पुराना निरंकुशता और तानाशाही का
युग समाप्त हो गया। दैवी अधिकारों के सिद्धांत पर आधारित राजतंत्र समाप्त हो गया
और उसके स्थान पर संवैधानिक राजतंत्र और बाद में गणतंत्र स्थापित हो गया।
2. लिखित संविधान-
क्रांति के बाद फ्रांस के लिए लिखित संविधान बनाया गया जिसमें व्यवस्थापिका,
कार्यपालिका, और न्यायपालिका के अधिकार और कर्तव्य स्पष्ट किये गये और
नागरिकों को मत देने का अधिकार प्राप्त हुआ। यह संविधान फ्रांस का ही नहीं,
अपितु यूरोप का भी प्रथम लिखित संविधान था।
3. लोकप्रिय सम्प्रभुता
का सिद्धांत- क्रांति ने राज्य के संबंध में एक नवीन धारणा को जन्म दिया और
राजनीति में नवीन सिद्धांत प्रतिपादित किये। लोकप्रियता जनता में निहित होती है।
इस क्रांति ने यह प्रमाणित कर दिया कि प्रजा ही वास्तव में राजनीतिक अधिकारों की
स्वामी है और सार्वभौम या सार्वजनिक सत्ता उसके पास ही है।
4. मानव अधिकारों की
घोषणा- क्रांति के दौरान मानव के मौलिक अधिकारों की घोषणा की गई। उसमें मनुष्य के
बहुमुखी विकास के लिए आवश्यक मूलभूत अधिकारों को स्पष्ट शब्दो में अभिव्यक्त किया
गया। कानून की दृष्टि में सभी नागरिकों को समानता प्रदान की गई। इससे जन सामान्य की
आशा-आकांक्षा का विस्तार हुआ और फ्रासं में एक लोकतंत्रीय समाज का निर्माण हुआ।
5. समान कानून और
कानूनों का संग्रह- कानूनों की विविधता समाप्त कर दी गई। नेपोलियन ने विभिन्न
कानूनों को एक करके दीवानी, फौजदारी तथा अन्य कानूनों का व्यवस्थित संग्रह करवाया जिससे
फ्रांस में एक सी कानून व्यवस्था स्थापित की गई। इस कानून-संग्रह को ‘‘कोड ऑफ
नेपोलियन’’ कहते हैं। बाद में आस्ट्रिया, इटली, जर्मनी, बेल्जियम, हॉलेण्ड और अमेरिका आदि देशों में भी काडे ऑफ नेपोलियन में
आवश्यकतानुसार आंशिक परिवर्तन करके उसे लागू कर दिया गया।
6. चर्च अर्थात धार्मिक
प्रभाव का खात्मा - क्रांति के उपरान्त चर्च की भूमि सत्ता और सम्पत्ति सरकार के
अधिकार में कर दी गई और पादरियों के लिये नवीन संविधान लागू किया गया और उनको
सरकारी कर्मचारियों के समान वेतन दिया जाने लाग।
7. सामाजिक समानता का
युग- पुरातन सामन्तवादी व्यवस्था का अंत इस क्रांति का महत्वपूर्ण प्रभाव था।
कुलीन सामन्तों की व्यवस्था, उनकी कर प्रणाली और उनके विशेष अधिकार समाप्त कर दिये गये।
उनके द्वारा लगाये गये कर भी समाप्त कर दिये गये। सामन्त प्रणाली और दास व्यवस्था
का अंत कर दिया गया।
8. कृषकों की दशा में
सुधार- क्रांति से पूर्व कृषकों की दशा दयनीय थी। सामन्त ओर पादरी विभिन्न करों
द्वारा उनका शोषण करते थे। इससे कृषक निर्धन हो गये थे क्रांति,
उनके लिये वरदान सिद्ध हुई। कृषकों को निर्दयी सामन्तों और
जागीरदारों के अत्याचारों करों, शोषण और दासता से छुटकारा मिला। उन्हान सामन्तो से प्राप्त
भूमि पर बड़े परिश्रम और लगन से कृषि की और उपज में वृद्धि की।
9. शिक्षा और साहित्य
में प्रगति- क्रांति के दौरान शिक्षा को केथोलिक चर्च के आधिपत्य और प्रबन्ध से
हटाकर उसे गणतंत्रीय सरकार के अधीन कर दिया। इस प्रकार शिक्षा का राष्ट्रीयकरण
किया। आधुनिक फ्रांस की राष्ट्रीय शिक्षा पद्धति की नींव क्रांति ने ही रखी। ज्ञान
वृद्धि के लिए अनेक विद्यालय, महाविद्यालय, तकनीकी संस्थान, प्रशिक्षण संस्थाएं और पेरिस का विश्वविद्यालय स्थापित किये
गये। लिखने, भाषण
देने और उदारवादी प्रगतिशील विचारों का प्रारंभ हुआ।
10. राष्ट्रीय भावना का
विकास- जब विदेशी सेनाओं ने राजतंत्र की सुरक्षा के लिए फ्रासं पर आक्रमण किए तब
विभिन्न वर्गो के लोगों ने सेना में भरती होकर अत्यतं वीरता ओर साहस से विदेशी
सेनाओं का सामना किया ओर विजय प्राप्त की। इस प्रकार देश की सुरक्षा के लिए
फ्रांसीसीयों में राष्ट्रीयता की भावना उत्पन्न हुई। इस राष्ट्रीय भावना और विजयों
से फ्रांस के सैनिक गौरव में अधिक वृद्धि हुई। समस्त यूरोप में सम्मिलित सैन्य
शक्ति का सामना जिस सफलता व दृढता से फ्रांस कर सका, उसका मूल आधार उसकी राष्ट्रीयता और एकता की भावना थी।
11. स्वतंत्रता,
समानता और बंधुत्व की भावना- फ्रांस की क्रांति ने यूरोप को
ही नहीं अपितु मानव समाज को भी स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के शाश्वत तत्व प्रदान किये। ये सदैव
जनता को स्फूर्त देने वाले रहै। क्रांति से समाज में आर्थिक और सामाजिक समानता की
भावना फैली, धार्मिक
स्वतंत्रता और सहनशीलता का प्रचार बढ़ा और नागरिक स्वतंत्रता प्रदान की गई।
व्यक्तिगत अधिकारों को मान्यता मिली। फ्रासं के क्रांतिकारी अन्य देशों की पीड़ित
जनता को अपना बंधु समझते थे। स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व के सिद्धांत और लोकतंत्र के विचार यूरोप के अन्य
देशों में शीघ्र ही फैल गये और इन विचारों के लिये संसार में तब से संघर्ष प्रारभ
हुआ।
12. यूरोप में क्रांति के
दूरगामी परिणाम- फ्रांस की क्रांति, एक अंतर्राष्ट्रीय महत्व का तीव्र आंदोलन था;
जिसके विस्तृत प्रसार से फ्रांस का इतिहास परिवर्तित हो
गया। फ्रांस का राष्ट्रनायक नेपोलियन यूरोप की निर्णायक सत्ता बन गया। नेपोलियन का
इतिहास यूरोप का इतिहास बन गया।
अथवा
जैकोबिन - पेरिस
के भूतपूर्व संत कॉन्वेंट ऑफ जैकब के नाम पर बना क्लब जो राजनीतिक समूह का अड्डा
हो गया था जिसके सदस्य छोटे दुकानदार और कारीगर थे जिनको 1791 के
बने संविधान में राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं हुए थे। जैकोबिंस ने अपनी कुछ खास
पहचान विकसित की थीं जो कि इस प्रकार थीं -
o सौं कुलान्त - जैकोबिनों को “सौ कुलाँत“ के नाम से जाना जाता था । ये
धारीदार पतलून पहनने वाले जैकोबिन होते थे जो स्वयं को ब्रीचेस पहनने वाले कुलीनों
से अलग दिखाते थे।
o लाल टोपी - सौं कुलॉत पुरूष लाल टोपी पहनते थे किन्तु महिलाओं को ऐसा
करने की अनुमति नहीं थी।
o राजतंत्र का उन्मूलन - बढ़ती
मंहगाई और जमाखोरी के खिलाफ जैकोबिनों ने पेरिस की जनता के साथ मिलकर ट्यूलेरिए के
महल पर हमला कर दिया तथा राजा सहित अनेक लोगों को बंदी बना लिया।
o कन्वेंशन - जैकोबिनों ने 21 वर्ष से अधिक आयु के सभी पुरूषों को मताधिकार देकर नई
असेंबली निर्वाचित की जिसे कन्वेंशन नाम दिया गया। इस तरह 21 सितम्बर 1792 को
फ्रांस से राजतंत्र का अंत होकर गणतंत्र की स्थापना हो गई।
आतंक का राज – 1793 से 1794 तक के जैकोबिन के शासनकाल को
आतंक का राज कहा जाता है. मैक्सिमिलिएन
डी रॉबस्पायर को फ्रांसीसी क्रांति के शासनकाल में अपनी भूमिका के लिए जाना जाता
है। इस समय के दौरान, चरमपंथी शासन का विरोध करने वाले किसी भी व्यक्ति
को कैद या मार दिया गया था। उसने संदिग्ध गद्दारों को सजा दिलाने के लिए गिलोटिन
का इस्तेमाल किया। 16,000 से अधिक "दुश्मनों" को आतंक के शासन के
तहत मार डाला गया था। इस कठोर शासन के परिणामस्वरूप, कई
क्रांतिकारी नेताओं के पास पर्याप्त आतंक था। इसलिए, उन्होंने
रॉबस्पेयर को चालू किया और उसे गिरफ्तार कर लिया। उन्हें और उनके समर्थकों को 28 जुलाई, 1794 को गिलोटिन द्वारा मार डाला गया था।
प्र.23-
दिए मानचित्र में निम्नलिखित में से किन्हीं चार को दर्शाइए
- 4
i. अरावली श्रेणी
ii. पूर्वी घाट
iii. विन्ध्य श्रेणी
iv. मैकल श्रृंखला
v. महानदी
vi. बैरन ज्वालामुखी
vii. कर्क रेखा
viii. सरक्रीक पॉइंट
धन्यवाद
आप सफल हों
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