विनिर्माण उद्योग
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अध्याय के अंतर्गत महत्वपूर्ण तथ्य -
1. कच्चे पदार्थ को मूल्यवान उत्पाद में परिवर्तित कर अधिक मात्रा
में वस्तुओं के उत्पादन को विनिर्माण कहते हैं।
2. विनिर्माण क्षेत्र अर्थव्यवस्था के द्वितीयक क्षेत्र के अंतर्गत
आता है।
3. विनिर्माण उद्योग कृषि के आधुनिकीकरण में सहायक है।
4. वे देश विकसित देश कहलाते हैं जो कच्चे माल को विभिनन तथा
अधिक मूल्यवान तैयार माल में विनिर्मित करते हैं।
5. सकल घरेलू उत्पाद में उद्योग का योगदान 27 प्रतिशत है जिसमें
से विनिर्माण उद्योग का योगदान 17 प्रतिशत है।
6. विनिर्माण उद्योग का जी डी पी में योगदान अन्य पूर्वी एशियाई
देशों की अपेक्षा कम है।
7. औद्योगीकरण प्रक्रिया के प्रारंभ होने के साथ साथ नगरीकरण
प्रारंभ होता है।
8. किसी उद्योग की अवस्थिति का निर्धारण उसकी न्यूनतम उत्पादन
लागत से निर्धारित होता है।
9. उद्योगों का वर्गीकरण :-
(अ) प्रयुक्त कच्चे माल के स्रोत के आधार पर -
·
कृषि आधारित
- सूती वस्त्र, ऊनी वस्त्र,
पटसन, रेषम वस्त्र, रबर, चीनी, चाय, काफी तथा वनस्पति तेल उद्योग।
·
खनिज आधारित
- लोहा तथा इस्पात, सीमेंट,
एल्यूमीनियम, मशीन, औजार तथा पेट्रो रसायन उद्योग।
(ब) प्रमुख भूमिका
के आधार पर -
·
आधारभूत उद्योग
- जिनके उत्पादन या कच्चे माल पर दूसरे उद्योग निर्भर हैं। जैसे - लोहा इस्पात,
तांबा प्रगलन व एल्यूमीनियम प्रगलन उद्योग।
·
उपभोक्ता
उद्योग - जो उपभेक्ताओं के सीधे उपयोग की वस्तुओं का उत्पादन करते हैं। जैसे - चीनी,
दंत मंजन, कागज, पंखे, सिलाई मशीन आदि।
(स) पूँजी निवेश के
आधार पर -
·
लघु उद्योग
- अधिकतम निवेश एक करोड़ रूपये तक।
·
वृहद उद्योग
- एक करोड़ से अधिक का निवेश।
(द) स्वामित्व के आधार पर -
·
सार्वजनिक
क्षेत्र के उद्योग - सरकारी नियंत्रण वाले।
·
निजी क्षेत्र
के उद्योग - व्यक्तिगत नियंत्रण वाले।
·
मिश्रित या
संयुक्त उद्योग - निजी तथा सरकारी दोनों के संयुक्त प्रयास से संचालित।
·
सहकारी उद्योग
- उत्पादकों तथा श्रमिकों दोनों के नियंत्रण वाले।
(इ) कच्चे तथा तैयार
माल की मात्रा व भारत के आधार पर -
·
भारी उद्योग
- जैसे लोहा और इस्पात उद्योग
·
हल्के उद्योग
- जैसे विद्युतीय उद्योग।
10. भारत का वस्त्र उद्योग पूर्णतः आत्मनिर्भर उद्योग है।
11. सूती वस्त्र बनाने के लिए अठारहवीं सदी के बाद बिजली से
चलने वाले करघों का उपयोग होने लगा।
12. पहला सफल सूती वस्त्र उद्योग 1854 में मुंबई में लगाया गया।
13. भारत , जापान को सूत निर्यात करता है।
14. पहला पटसन उद्योग कोलकाता के निकट रिशरा में 1855 में लगाया
गया।
15. पटसन के प्रमुख यारीददार अमेरिका,
कनाडा,घाना,सउदी अरब,यू के तथा ऑस्ट्रेलिया है।
16. चीनी उद्योग मौसमी उद्योग है अतः यह सहकारी क्षेत्र के लिए
उपयुक्त है।
17. लोहा तथा इस्पात उद्योग में लौह अयस्क,
कोकिंग कोल तथा चूना पत्थर का उपयोग होता है।
18. स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया, सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है।
पाठ्यपुस्तक आधारित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर -
1. बहुवैकल्पिक प्रश्न
(i) निम्न
में से कौन-सा उद्योग चुना पत्थर को कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त करते हैं?
(अ) एल्युमिनियम (ब) चीनी
(स) सीमेंट (द) पटसन
(ii) निम्न में से कौन-सी एजेंसी सार्वजनिक क्षेत्र में स्टील को बाजार में उपलब्ध
कराती है?
(अ) भेल (ब) सेल
(स) टाटा स्टील (द)
एम.एन.सी.सी.
(iii) निम्न में से कौन-सा उद्योग बॉक्साइट को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करता है?
(अ) एल्युमिनियम (ब) सीमेंट
(स) पटसन (द) स्टील
(iv) निम्न में से कौन-सा दूरभाष, कंप्यूटर आदि संयंत्र निर्मित करते हैं?
(अ) स्टील (ब) एल्युमीनियम
(स) इलैक्ट्रॉनिक (द) सूचना प्रौद्योगिकी
01 अंक हेतु अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर -
(1) विनिर्माण उद्योग क्रिया है?
(अ) प्राथमिक (ब) द्वितीयक
(स) तृतीयक (द) चतुर्थक
(2) लोहा तथा इस्पात उद्योग है।
(अ) आधारभूत उद्योग (ब)
कृषि आधारित उद्योग
(स) उपभोक्ता उद्योग (द) सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग
(3) 1854 में पहला सफल सूती वस्त्र उद्योग लगाया
गया।
(अ) सूरत (ब) अहमदाबाद
(स) कोलकाता (द) मुंबई
(4) भारत की अधिकांश पटसन मिलें पश्चिम बंगाल
में किस नदी के किनारे हैं?
(अ) रावी (ब) महानदी
(स) गोदावरी (द) हुगली
(5) चीनी उद्योग में प्रयुक्त कच्चा माल है।
(अ) कपास (ब) गन्ना
(स) अभ्रक (द) जूट
(6) किसी देश की आर्थिक शक्ति का आधार होता है।
(अ) कृषि (ब) सॉफटवेयर
(स)
विनिर्माण उद्योग (द) आयात और निर्यात
(7) कौन सा विकास सामान्य तौर पर ओद्योगिक गतिविधियों
का अनुसरण करता है?
(अ) कृषि (ब) नगरीकरण
(स)
खनन (द) स्वास्थ्य
(8) कौन सा कारक उद्योगों की अवस्थिति में महत्वपूर्ण
कारक है।
(अ) पूँजी और न्यूनतम उत्पादन लागत (ब) परिवहन
ओर बाजार की उपलब्धता
(स) कच्चे माल ओर शक्ति की उपलब्धता (द) श्रम शक्ति की उपलब्धता
(9) लोहा इस्पात उद्योग में लौह अयस्क, कोकिंग कोल तथा
चूना पत्थर का अनुपात होता है।
(अ) 4:2:1 (ब) 1:1:1
(स) 3:2:1 (द) 1:2:4
सत्य/असत्य बताइए -
1. औद्योगीकरण से विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होती है।
2. गन्ने में सुक्रोस पाया जाता है।
3. विश्व युद्ध के दौरान यूरोप में भारतीय सूती वस्त्रों की
मांग बढ़ गई थी।
4. केरल का नारियल उद्योग सहकारिता आधारित उद्योग है।
5. पिछले एक दशक में भारतीय विनिर्माण क्षेत्र में 7 प्रतिशत
प्रतिवर्ष की दर से वृद्धि हुई।
उत्तरमाला
पाठ्यपुस्तक पर आधारित प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1 बहुवैकल्पिक प्रश्न
(i) - (स) सीमेंट
(ii) - (ब) सेल
(iii) - (अ) एल्युमिनियम
(iv) - (स) इलैक्ट्रॉनिक
1 :- (ब) द्वितीयक
2 :- (अ) आधारभूत उद्योग
3 :- (द) मुंबई
4 :- (द) हुगली
5 :- (ब) गन्ना
6 :- (स) विनिर्माण उद्योग
7 :- (ब) नगरीकरण
8 :- (अ) पूँजी और न्यूनतम उत्पादन लागत
9 :- (अ) 4:2:1
सत्य / असत्य बताओ
उत्तर - सभी सत्य
03 अंकों हेतु महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
-
(1) विनिर्माण क्या है?
उत्तरः- कच्चे पदार्थ को मूल्यवान उत्पाद में बदलकर अधिक मात्रा
में वस्तुओं के उत्पादन को विनिर्माण या वस्तु निर्माण कहा जाता है। जैसेः कपास से
सूत या कपड़ा, लुगदी से
कागज, गन्ना से
चीनी, गेहूं से
आटा, आटा से रोटी या बिस्कुट,
लौह अयस्क से लोहा-इस्पात, खनिज तेल से रासायनिक पदार्थ तथा बॉक्साइट से एल्युमिनियम बनाने
की प्रक्रिया को विनिर्माण उद्योग कहा जाता है।
(2) उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले
तीन भौतिक कारक बताएँ?
उत्तर :-
(1) कच्चे माल की उपलब्धताः- निर्माण उद्योग की सबसे प्रथम आवश्यकता
कच्चे माल की होती है। जिसका रूप और उपयोग बदलकर मूल्य में वृद्धि की जाती है। कच्चे
माल अपेक्षाकृत सस्ते तथा सरलता से प्राप्त होने चाहिए। जैसेः- सीमेंट के लिए कच्चा
माल चूना पत्थर है, उसी
प्रकार कपड़ा के लिए कच्चा माल कपास है।
(2) शक्ति के साधन :- वर्तमान में सभी निर्माण उद्योग किसी न
किसी रूप से शक्ति साधनों पर निर्भर करते हैं। मशीनों को चलाने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता
पड़ती है।
(3) जलवायु :- उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए जलवायु
और स्वास्थ्य अनुकूल होना जरूरी है। साथ ही कुछ उद्योगों के लिए विशेष प्रकार की जलवायु
का महत्व होता है। जैसे सूती वस्त्र उद्योग के लिए आर्द्र जलवायु का होना जरूरी है।
जिससे धागे टूटते नहीं है। यही कारण है कि महाराष्ट्र और गुजरात के आसपास सूती वस्त्र
के कारखाने अधिक है। ये दोनों क्षेत्र समुद्र के किनारे हैं।
(3) औद्योगिक अवस्थिति को प्रभावित करने वाले
तीन मानवीय कारण बताएँ।
उत्तर :-
(1) पूंजीः- पूंजी के बिना औद्योगिक विकास संभव नहीं है। क्योंकि
उद्योग लगाने, मशीन खरीदने,
कच्चे माल आदि के लिए पूंजी की आवश्यकता पड़ती है। इस कारण उद्योगों
में पूंजी महत्वपूर्ण कारक है।
(2) बैंकिंग सुविधाः- उद्योग धंधों में प्रतिदिन लाखों रुपए
का लेनदेन होता है। साथ ही उद्योगों को लगाने के लिए पूंजी की आवश्यकता पड़ती है। जिसका कुछ हिस्सा बैंकों
से कर्ज के रूप में लेना पड़ता है। जो बैंकों द्वारा ही संभव है। जहाँ इस प्रकार की
सुविधा होती है। वहाँ उद्योग-धंधे आसानी से स्थापित होती हैं।
(3) सरकार की नीतिः- सरकार अपनी नीतियों के अनुसार उद्योगों
को बढ़ावा देती है। उदाहरण के लिए हरिद्वार में दवाईयाँ बनाने का कारखाना सरकार द्वारा
किए गए प्रयासों का ही परिणाम है। कुछ वर्ष पूर्व सरकार के अरुचि के कारण ही बंगाल
से टाटा की इकाई को हटाकर गुजरात में लगाया गया था।
(4) आधारभूत उद्योग क्या हैं? उदाहरण देकर
बताएँ।
उत्तर :- वैसे उद्योग जिनसे प्राप्त उत्पाद अन्य उद्योगों में
कच्चे माल के रूप में प्रयोग में लाए जाते हैं। इसलिए इन्हें आधारभूत उद्योग कहते हैं।
जैसेः- लोहा-इस्पात उद्योग, तांबा प्रगलन उद्योग, एलुमिनियम प्रगलन उद्योग एवं पेट्रो रासायनिक उद्योग इत्यादि।
(5) समन्वित इस्पात उद्योग मिनी इस्पात उद्योगों
से कैसे भिन्न है? इस उद्योग की क्या समस्याएं हैं? किन सुधारों
के अंतर्गत इसकी उत्पादन क्षमता बढ़ी हैं?
उत्तर :- समन्वित इस्पात उद्योग - समंवित या एकीकृत इस्पात संयंत्र एक बड़ा संयंत्र होता है। एकीकृत
इस्पात संयंत्र से हमारा तात्पर्य ऐसे कारखाने से है। जहां एक ही स्थान पर,
धमन भट्टी में लोहे को पिघलाकर पिग आयरन बनाना,
उससे इस्पात बनाना, इस्पात की चादरें, पाइप, लोहे की रेल पटरिया आदि बनाया जाता है।
इस समय देश में लोहा और इस्पात बनाने वाले 10 प्रमुख एकीकृत
कारखाने हैं।
मिनी इस्पात उद्योग , विद्युत चालित धमन भट्टिया सामान्यतः छोटे इस्पात संयंत्र कहलाते
हैं। इन संयंत्रों में इस्पात बनाने के लिए स्क्रेप तथा स्पंज लोहे का प्रयोग होता
है। लोहा इस्पात से संबंधित ये इकाइयाँ हल्के किस्म का इस्पात तैयार करते हैं। इस समय
भारत में लगभग 200 से अधिक छोटे इस्पात संयंत्र काम कर रहे हैं।
लोहा- इस्पात उद्योग की समस्याएं -
(1) कोकिंग कोयला की सीमित उपलब्धता :- हमारे देश में लोहा तो
प्रचुर मात्रा में है लेकिन इस उद्योग में प्रयोग होने वाला कोकिंग कोयला की कमी है।
(2) स्वदेशी तकनीक की कमी :- भारत में लोहा- इस्पात के क्षेत्र
में स्वदेशी तकनीक की कमी इसके विकास में प्रमुख समस्या है।
(3) ऊर्जा की अनियमित पूर्ति :- हमारे देश में ऊर्जा की काफी
विकास किया गया है फिर भी ऊर्जा की आपूर्ति नियमित नहीं है।
(4) पूंजी की कमी :- इस उद्योग को स्थापित करने के लिए पर्याप्त
पूंजी की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि अधिकांश लोह- इस्पात संयंत्र सार्वजनिक
क्षेत्र में है।
(5) परिवहन की कमी :- इस उद्योग में प्रयुक्त कच्चे माल के लिए
सस्ते परिवहन की आवश्यकता होती है। भारतः में यह मुख्यतः रेलवे द्वारा ही ढ़ोया जाता
है जो महंगा पड़ता है।
(7) कम श्रमिक उत्पादकता :- इस उद्योग के लिए देश में कुशल श्रमिकों
की कमी है।
उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए किए गए सुधार-
(1) निजी क्षेत्र में लगातार उद्यमियों की संख्या बढ़ रही है
उनके निजी प्रयत्न से देश के लोहा इस्पात उत्पादन में पिछले कुछ वर्षों से बढ़ोतरी हुई
है।
(2) उदारीकरण की नीति से भी सार्थक परिणाम मिले हैं।
(3) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भी इस उद्योग में लगातार बढ़ रहा
है जिसके परिणाम स्वरूप लोहा- इस्पात उद्योग को प्रोत्साहन मिला है तथा उत्पादन में
काफी वृद्धि हुई है।
(4) इस उद्योग में नई-नई तकनीक को लागू किया गया है। लेकिन,
इस्पात उद्योग को अधिक स्पर्धावान बनाने के लिए अनुसंधान और
विकास के साधनों को नियत करने की आवश्यकता है।
04 अंकों हेतु महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
-
1. लोहा तथा इस्पात उद्योग के लिए आवश्यक आधारभूत
वस्तुओं का वर्णन करें?
उत्तरः- लोहा इस्पात के लिए आवश्यक आधारभूत वस्तु अर्थात कच्चा
माल लौह अयस्क, कोकिंग कोयला,
चूना पत्थर है। ये क्रमशः 4:2:1 के अनुपात में उपयोग में लाए
जाते हैं। इस को कठोर बनाने के लिए इसमें कुछ मात्रा में मैग्नीज की आवश्यकता पड़ती
है।
2. भारत में प्रति व्यक्ति इस्पात की खपत इतनी
कम क्यों है?
उत्तरः- विकसित देशों की अपेक्षा भारत में इस्पात की खपत कम
है इसके कुछ निम्न कारण है-
(1) भारत में लोगों का आय का निम्न स्तर है।
(2) भारत में इस्पात के विकल्प कम मूल्य में मिल जाते हैं तथा
वे टिकाऊ भी होते हैं।
(3) इस्पात के ये विकल्प वजन में हल्के होते हैं तथा आसानी से
एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने में भी सुविधाजनक होते हैं।
(4) इस्पात अधिक महंगा होने के कारण आम लोगों की पहुंच से दूर
है।
3. आप घरेलू उद्योगों के विषय में क्या जानते
हैं?
उत्तरः- इस प्रकार के उद्योगों में अधिकतर दो या दो से अधिक
परिवार के सदस्य मिलकर कार्य करते हैं। वे ऐसी वस्तुओं का निर्माण करते हैं जिनके लिए
कच्चा माल स्थानीय तौर पर उपलब्ध होता है। इस प्रकार की अधिकतर वस्तुएं हाथ से बनाई
जाती हैं। जैसेः- टोकरी, चटाई, फूलदान बनाना, घड़ा सुराही, पापड़, पतल बनाना इत्यादि।
4. महात्मा गांधी ने सूत काटने तथा खादी बुनने
पर क्यों बल दिया?
उत्तरः- स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए महात्मा गांधी
ने सूत काटने तथा खादी बुनने पर बल दिया था। इसके कुछ निम्नलिखित कारण थे-
(1) राष्ट्रीयता की भावना को जागृत करने हेतु
(2) अधिक से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य
से
(3) ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने के
लिए
(4) विदेशी कपड़ों पर निर्भरता कम करने तथा विदेशी कपड़े का बहिष्कार
करने के उद्देश्य से
5. छोटानागपुर पठार के आसपास लोहा इस्पात उद्योग
के अधिक केंद्रित होने के क्या कारण है?
उत्तरः- छोटानागपुर के पठारी क्षेत्र में अधिकांश लोहा तथा इस्पात
उद्योग केंद्रित है। जमशेदपुर, बोकारो, दुर्गापुर, राउरकेला और भिलाई में लोह इस्पात के कारखाने लगे हुए हैं। इस
क्षेत्र में इस उद्योग के विकास के लिए अधिक अनुकूल दशाएं मौजूद है। जो निम्न है-
(1) छोटानागपुर के पठार में प्रचुर मात्रा में लौह अयस्क उपलब्ध है। झारखंड और उड़ीसा के सीमावर्ती क्षेत्रों
में लौह अयस्क के कई खाने हैं। जिस कारण यहां लोह अयस्क की ढुलाई पर कम खर्च आता है।
(2) लोह इस्पात बनाने
के लिए ऊर्जा के रूप में कोयले की बड़ी मात्रा में आवश्यकता पड़ती है। छोटानागपुर का
पठार गोंडवाना क्रम के कोयला के क्षेत्र में है। जिस कारण यहां कोयले की सस्ते दर पर
आपूर्ति हो जाती है।
(3) लोह इस्पात में प्रयुक्त होने वाले अन्य कच्चा माल जैसे
चूना पत्थर और मैग्नीज भी यहां प्रचूर मात्रा में उपलब्ध है।
(4) छोटानागपुर पठार का उत्तर प्रदेश,
बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे सघन जनसंख्या वाले क्षेत्र से सटे
होने के कारण यहां सस्ते श्रमिक उपलब्ध हो जाते हैं।
(5) आसपास के क्षेत्रों में सघन जनसंख्या के कारण लौह इस्पात
की बड़ी मांग है।
(6) छोटानागपुर पठार में परिवहन के साधन के रूप में रेल और सड़क
परिवहन का विकास समुचित रूप से हुआ है।
उपरोक्त कारणों के कारण ही छोटानागपुर पठार के आसपास लोह इस्पात
उद्योग अधिक लगे हुए हैं। ।
6. स्टील के उत्पादन और खपत को किसी देश के विकास
के सूचक के रूप में क्यों लिया जाता है?
उत्तरः लोहा इस्त्पात उद्योग एक आधारभूत उद्योग है क्योंकि लोहे
का इस्तेमाल मशीनों को बनाने में होता है। इस कारण से स्टील के उत्पादन और खपत को किसी
भी देश के विकास के सूचक के रूप में लिया जाता है।
7. उद्योग पर्यावरण को कैसे प्रदूषित करते हैं?
उत्तर - उद्योग पर्यावरण को निम्न तरीकों से प्रदूषित करते हैंः
(क) वायु प्रदूषणः कार्बन डाइऑक्साइड,
सल््फर डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड के बढ़ते स्तर के कारण
वायु प्रदूषण होता है। वायु में निलंबित कणनुमा पदार्थों से भी समस्या होती है। कारखानों
की चिमनियों से धुँआ निकलता है। कुछ उद्योगों से हानिकारक रसायन भी निकलने का खतरा
रहता है।
(ख) जल प्रदूषणः उद्योग से निकलने वाला कार्बनिक और अकार्बनिक
कचरा और अपशिष्ट से जल प्रदूषण होता है। जल प्रदूषण के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार
उद्योग हैं; कागज,
लुगदी, रसायन, कपड़ा, डाई, पेट्रोलियम रिफाइनरी, चमड़ा उद्योग, आदि।
(ग) भूमि प्रदूषणः कुछ उद्योगों से ऐसे अपशिष्ट पदार्थ बाहर
निकलते हैं जिनमें विषैली धातुओं के कण शामिल होते हैं। ये कण मिट्टी को प्रदूषित करते
हैं।
(घ) ध्वनि प्रदूषणः ध्वनि प्रदूषण से बेचैनी,
उच्च रक्तचाप और बहरापन की समस्या होती है। कारखाने के मशीन,
जेनरेटर, इलेक्ट्रिक ड्रिल, आदि से काफी ध्वनि प्रदूषण होता है।
(ड) तापीय प्रदूषणः कारखानों तथा तापघरों से गर्म जल को प्रायः
बिना ठंडा किए ही नदियों तथा तालाबों में छोड़ दिया जाता है। इससे जन्मजात विकार,
कैंसर, अकाल प्रसव जैसी बीमारियाँ होती हैं।
8. उद्योगों द्वारा पर्यावरण निम्नीकरण को कम
करने के लिए उठाए गए विभिन्न उपायों की चर्चा करें।
अथवा
भारत में औद्योगिक विकास के कारण उत्पन्न पर्यावरणीय
निम्नीकरण को कम करने के लिए कोई तीन उपाय सुझाइये।
उत्तर - उद्योग द्वारा पर्यावरण को होने वाले नुकसान की रोकथामः
·
जल का पुनःचक्रीकरण
होना चाहिए। इससे ताजे पानी के इस्तेमाल को कम किया जा सकता है।
·
वर्षाजल संग्रहण
पर जोर देना चाहिए।
·
गरम पानी
और अपशिष्टों को समुचित उपचार के बाद ही नदियों और तालाबों में छोड़ना चाहिए।
·
चिमनी में
इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर लगना चाहिए ताकि निलंबित कण हवा में न पहुँचने पाएँ।
9. विनिर्माण क्षेत्र को देश के आर्थिक विकास
की रीढ़ कैसे माना जाता है? इस संबंध में कोई तीन बिन्दु स्पष्ट कीजिए।
अथवा
“किसी देश की आर्थिक ताकत विनिर्माण उद्योगों
के विकास से मापी जाती है।“ तर्क सहित कथन का समर्थन करें।
उत्तरः विनिर्माण क्षेत्र को निम्नलिखित कारणों से हमारे देश
के आर्थिक विकास की रीढ़ माना जाता हैः
(1) विनिर्माण उद्योग न केवल कृषि को आधुनिक बनाने में मदद करते
हैं, जो हमारी अर्थव्यवस्था
की रीढ़ है, बल्कि वे
लोगों को माध्यमिक और तृतीयक क्षेत्रों में नौकरियां प्रदान करके कृषि आय पर भारी निर्भरता
को भी कम करते हैं।
(2) औद्योगिक विकास हमारे देश से बेरोजगारी और गरीबी को मिटाता
है। भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों और संयुक्त क्षेत्र के उद्यमों के पीछे
यही मुख्य दर्शन था। इसका उद्देश्य आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों में उद्योग स्थापित
करके क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना भी था।
(3) विनिर्मित वस्तुओं के निर्यात से व्यापार और वाणिज्य का
विस्तार होता है, और
बहुत आवश्यक विदेशी मुद्रा आती है।
(4) जो देश अपने कच्चे माल को विभिन्न प्रकार के उच्च मूल्य
के तैयार माल में बदलते हैं वे समृद्ध होते हैं। भारत की समृद्धि अपने विनिर्माण उद्योगों
को यथाशीघ्र बढ़ाने और विविधता लाने में निहित है।
10. “कृषि औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा देती है।”
तर्क सहित कथन का समर्थन करें।
उत्तरः कृषि और उद्योग एक दूसरे से अलग नहीं हैं।
(1) वे हाथ में हाथ डालकर चलते हैं।
(2) भारत में कृषि-उद्योग ने अपनी उत्पादकता बढ़ाकर कृषि को बड़ा
बढ़ावा दिया है।
(3) वे कच्चे माल के लिए कृषि पर निर्भर हैं और किसानों को अपने
उत्पाद जैसे सिंचाई पंप, उर्वरक, कीटनाशक, कीटनाशक, प्लास्टिक और पीवीसी पाइप, मशीनें और उपकरण आदि बेचते हैं।
(4) इस प्रकार, विनिर्माण उद्योग के विकास और प्रतिस्पर्धात्मकता ने न केवल
कृषकों को अपना उत्पादन बढ़ाने में सहायता की है, बल्कि उत्पादन प्रक्रियाओं को भी बहुत कुशल बना दिया है।
11. “किसी देश की आर्थिक ताकत विनिर्माण उद्योगों
के विकास से मापी जाती है।“ इस कथन के समर्थन में तीन तर्क दीजिए।
उत्तरः (1) वैश्वीकरण की वर्तमान दुनिया में,
हमारे उद्योग को अधिक कुशल और प्रतिस्पर्धी होने की आवश्यकता
है, केवल आत्मनिर्भरता ही
पर्याप्त नहीं है।
(2) हमारा निर्मित सामान अंतरराष्ट्रीय बाजार के सामान की गुणवत्ता
के बराबर होना चाहिए। तभी हम अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे और विदेशी
मुद्रा अर्जित कर सकेंगे।
(3) जो देश अपने कच्चे माल को विभिन्न प्रकार के उच्च मूल्यों
के सुसज्जित सामानों में बदलते हैं वे समृद्ध हैं जैसे जापान और अमेरिका औद्योगिकीकृत
हैं। भारत की समृद्धि अपने विनिर्माण उद्योगों को यथाशीघ्र बढ़ाने और विविधता लाने में
निहित है।
12. “कपड़ा उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था में अद्वितीय
स्थान रखता है।” औचित्य लिखिए।
अथवा
भारतीय अर्थव्यवस्था में कपड़ा उद्योग के योगदान
की व्याख्या करें।
उत्तरः कपड़ा उद्योग निम्नलिखित कारणों से भारतीय अर्थव्यवस्था
में अद्वितीय स्थान रखता हैः
(1) यह भारतीय अर्थव्यवस्था में एक अद्वितीय स्थान रखता है क्योंकि
यह औद्योगिक उत्पादन (14 प्रतिशत) में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
(2) यह लगभग 35 मिलियन लोगों को सीधे रोजगार देता है और लगभग
24.6 प्रतिशत विदेशी मुद्रा अर्जित करता है। कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा।
(3) उद्योग का कृषि के साथ घनिष्ठ संबंध है और यह किसानों,
कपास की गेंद तोड़ने वालों और ओटने, कताई, बुनाई, रंगाई, डिजाइनिंग, पैकेजिंग, सिलाई और सिलाई में लगे श्रमिकों को आजीविका प्रदान करता है।
(4) हाथ से बनी खादी बुनकरों को कुटीर उद्योग के रूप में उनके
घरों में बड़े पैमाने पर रोजगार प्रदान करती है।
(5) भारत जापान को सूत निर्यात करता है और संयुक्त राज्य अमेरिका,
ब्रिटेन, रूस, फ्रांस, पूर्वी यूरोपीय देशों, नेपाल, सिंगापुर, श्रीलंका और अफ्रीकी देशों को कपास का सामान निर्यात करता है।
यह लगभग 24.6ः विदेशी मुद्रा अर्जित करने में मदद करता है।
(6) सूती धागे के विश्व व्यापार में हमारी बड़ी हिस्सेदारी है,
जो कुल व्यापार का दसवां हिस्सा है।
(7) हमारी कताई मिलें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हैं और हमारे
द्वारा उत्पादित सभी फाइबर का उपयोग करने में सक्षम हैं।
(8) यह हमारी जीडीपी में 4 प्रतिशत का योगदान देता है। यह उद्योग
कच्चे माल से लेकर उच्चतम मूल्य वर्धित उत्पादों तक मूल्य श्रृंखला में आत्मनिर्भर
और पूर्ण है।
13. जूट उत्पादों की मांग आंतरिक और वैश्विक स्तर
पर क्यों बढ़ी है?
उत्तरः निम्नलिखित कारणों से जूट उत्पादों की मांग आंतरिक और
वैश्विक स्तर पर बढ़ीः
(1) जूट एक बायोडिग्रेडेबल उत्पाद है और प्लास्टिक के आक्रमण
के कारण, जूट को पर्यावरण
के अनुकूल बनाने की आवश्यकता है।
(2) कई देश प्लास्टिक की थैलियों से छुटकारा पाना चाहते हैं
और इसकी जगह पर्यावरण अनुकूल जूट के थैले लाना चाहते हैं।
(3) जूट उद्योग बड़ी संख्या में सीमांत किसानों का भी समर्थन
करता है जो भारत और बांग्लादेश जैसे देशों में जूट और मेस्टा की खेती में लगे हुए हैं।
(4) सरकार की जूट पैकेजिंग नीति के कारण भारत में आंतरिक मांग
बढ़ी है।
14. “इस्पात के उत्पादन और खपत को अक्सर किसी
देश के विकास का सूचकांक माना जाता है।“ कथन का परीक्षण करें.
उत्तरः (1) लोहा और इस्पात उद्योग बुनियादी उद्योग है। चूंकि
अन्य सभी उद्योग-भारी, मध्यम
और हल्के, अपनी मशीनरी
के लिए इस पर निर्भर हैं।
(2) विभिन्न प्रकार के इंजीनियरिंग सामानों के निर्माण के लिए
स्टील की आवश्यकता होती है।
(3) निर्माण सामग्री, रक्षा, चिकित्सा, टेलीफोन, वैज्ञानिक उपकरण और विभिन्न प्रकार की उपभोक्ता वस्तुओं के रूप
में भी इसकी आवश्यकता होती है। इसलिए, स्टील के उत्पादन और खपत को अक्सर किसी देश के विकास का सूचकांक
माना जाता है।
15. एल्युमीनियम प्रगलन उद्योग विद्युत क्षेत्र
के निकट क्यों है? एल्यूमीनियम प्रगलन के स्थान के लिए अन्य महत्वपूर्ण
कारकों का वर्णन करें। इस उद्योग को महत्व क्यों मिल रहा है? कारण दो।
उत्तरः (1) एल्युमीनियम गलाने का उद्योग बिजली क्षेत्र के करीब
है क्योंकि बिजली की नियमित आपूर्ति उद्योग के लिए पूर्व शर्त है।
(2) एल्युमीनियम के निर्माण के लिए प्रति टन बॉक्साइट अयस्क
पर 18,600 किलोवाट बिजली की आवश्यकता होती है। देश में एल्युमीनियम गलाने के संयंत्र
ओडिशा, पश्चिम बंगाल,
केरल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में स्थित हैं।
एल्युमीनियम उद्योग निम्नलिखित कारणों से शक्ति प्राप्त कर रहा
हैः
(1) यह हल्का है, संक्षारण प्रतिरोधी है, गर्मी का अच्छा संवाहक है, लचीला है और अन्य धातुओं के साथ मिश्रित होने पर मजबूत हो जाता
है।
(2) इसका उपयोग वायुयान, बर्तन तथा तार बनाने में किया जाता है।
(3) इसने कई उद्योगों में स्टील, तांबा, जस्ता और सीसा के विकल्प के रूप में लोकप्रियता हासिल की है।
स्थान के कारक
बॉक्साइट, स्मेल्टर में उपयोग किया जाने वाला कच्चा माल एक बहुत भारी,
गहरे लाल रंग की चट्टान है।
16. भारत में ऑटोमोबाइल उद्योग पर उदारीकरण के
प्रभाव का परीक्षण करें।
उत्तरः (1) ऑटोमोबाइल माल, सेवाओं और यात्रियों के त्वरित परिवहन के लिए वाहन प्रदान करते
हैं।
(2) इस उद्योग ने 15 वर्षों से भी कम समय में एक बड़ी छलांग का
अनुभव किया है।
(3) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से नई तकनीक आई और उद्योग को वैश्विक
विकास के साथ जोड़ा गया।
(4) अब आपके पास दुनिया के किसी भी हिस्से में लॉन्च किया गया
कोई नवीनतम ऑटोमोबाइल वाहन है, साथ ही वह हमारे देश में लॉन्च किया गया है।
(5) उदारीकरण के बाद, नए और समकालीन मॉडलों के आने से बाजार में वाहनों की मांग में
वृद्धि हुई, जिससे यात्री
कारों, दो और तीन
पहिया वाहनों सहित उद्योग की स्वस्थ वृद्धि हुई।
===०००===
आप सफल हों
शुभकामनायें